Meghnad: जानिए कौन था मेघनाद और उसे कौन सा वरदान था प्राप्त
Meghnad: मेघनाद रावण और मंदोदरी का पुत्र था और उसे ब्रह्म देव से वरदान भी प्राप्त था, तभी तो राम जी से युद्ध के दौरान उसने शक्ति बाण से लक्ष्मण जी को मूर्छित कर दिया था। तो आइए जानते हैं कि आखि मेघनाद जिसे इंद्रजीत के नाम से जाना जाता है वह इतना शक्तिशाली कैसे बना।
मेघनाद रावण का पराक्रमी पुत्र
लंकापति रावण का सबसे बड़ा पुत्र मेघनाद था। रावण एक महान विद्वान था और वह चाहता था कि उसका पुत्र उससे भी अधिक बुद्धिमान और शक्तिशाली हो। इसीलिए उसने मेघनाद को बहुत अच्छे से प्रशिक्षित किया। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, रावण ने मेघनाद को अमर बनाने के लिए सभी देवताओं को उसके जन्म के समय एक ही स्थान पर आने के लिए कहा था। लेकिन शनि देव ने रावण की बात नहीं मानी और एक अलग जगह पर बैठ गए। इसी वजह से मेघनाद अमर नहीं बन सका। जब राम और रावण के बीच युद्ध हुआ तो मेघनाद ने राम की सेना के खिलाफ बहुत बहादुरी से लड़ाई लड़ी। लेकिन अंत में लक्ष्मण ने मेघनाद को मार डाला।
मेघनाद नाम की कहानी
मेघनाद का नाम मेघनाद क्यों रखा गया, इसके पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है। जब मेघनाद का जन्म हुआ तो उसकी रोने की आवाज बादलों की गड़गड़ाहट जैसी थी। इसीलिए उसका नाम मेघनाद रखा गया।
मेघनाद को क्यों कहा जाता है इंद्रजीत
रामायण में मेघनाद को इंद्रजीत के नाम से भी जाना जाता है। यह उपाधि उसे इसलिए मिली क्योंकि उसने इंद्र देव को युद्ध में पराजित किया था। जब रावण ने स्वर्ग पर आक्रमण किया था, तब मेघनाद ने इंद्र देव और उनके वाहन एरावत पर हमला किया था और उन्हें पराजित कर दिया था। इस महान विजय के कारण ही उसे इंद्रजीत कहा जाने लगा। मेघनाद ने ब्रह्मा जी से अमर होने का वरदान मांगा था। लेकिन ब्रह्मा जी ने उसे एक विशेष रथ प्राप्त करने का वरदान दिया। इस रथ पर बैठकर मेघनाद अपराजेय हो जाता था। हालांकि, ब्रह्मा जी ने यह भी कहा कि मेघनाद को केवल वही व्यक्ति मार सकता है जो लगातार 14 साल तक सोया न हो। लक्ष्मण ने वनवास के दौरान 14 साल तक नींद नहीं ली थी, इसलिए वे ही मेघनाद को मार सकते थे। इसलिए मेघनाद ने शक्ति बाण के द्वारा लक्ष्मण को मूर्छित कर दिया।
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