Mahakumbh 2025: हरिद्वार, उज्जैन, प्रयागराज और नासिक में ही क्यों लगता है महाकुंभ का मेला, यहां जानें

 Mahakumbh 2025: हरिद्वार, उज्जैन, प्रयागराज और नासिक में ही क्यों लगता है महाकुंभ का मेला, यहां जानें

Mahakumbh 2025: कुंभ मेला को लेकर हर किसी के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर प्रयागराज, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में ही क्यों कुंभ का आयोजन होता है। तो आइए इस खबर में आपके कन्फ्यूजन को दूर करते हैं


Mahakumbh 2025

Mahakumbh 2025: कुंभ करोड़ों हिंदुओं के लिए एक महार्व है। कुंभ का इंतजार हर हिंदुओं को बड़े ही बेसब्री से रहता है। कुंभ में आने वाले लोगों के मन में आस्था भरा रहता है, वे पवित्र नदी में स्नान करते हैं। कुंभ में स्नान करने से सभी बुरे कर्मों से मुक्ति मिल जाती है।

धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गंगा नदी में कुंभ के दौरान स्नान किया जाता है ताकि जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति मिल जाएं। इन्हीं उम्मीदों से देश और विदेश से श्रद्धालु स्नान करने के लिए प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन या नासिक में आते रहते हैं। हर किसी के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर इन्हीं चार शहरों में कुंभ क्यों लगता है। तो आज इस खबर में जानेंगे कि आखिर प्रयाग, हरिद्वार, नासिक और उज्जैन में ही क्यों कुंभ लगता है। आइए विस्तार से जानते हैं।

इन चार शहरों में क्यों लगता है कुंभ मेला ( Kyu In Char Jagah Par Lagta Hai Kumbh Mela)

प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में कुंभ मेला लगने के पीछे धार्मिक कारण बताया गया है, क्योंकि इन चार जगहों का संबंध पौराणिक ग्रंथों में कुंभ से बताया गया है। इन जगहों पर प्रत्येक 12 साल के अंतराल पर कुंभ मेला का आयोजन होता है। प्रयागराज में त्रिवेणी संगम ( गंगा, यमुना और सरस्वती) हरिद्वार में गंगा, उज्जैन में शिप्रा और नासिक में गोदावरी है।

कुंभ मेला लगने का मुख्य कारण समुद्र मंथन में अमृत से है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब देवताओं और राक्षसों ने समुद्र में मंथन किया था तो उसमें निकले सभी रत्नों को आपस में बांटने का फैसला किया। समुद्र मंथन में सबसे किमती रत्न अमृत निकला था। उसे पाने के लिए दानवों और देवताओं में युद्ध होने लगी। इसी बीच असुरों से अमृत बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अमृत कलश को अपने वाहन गरुड़ को दे दिया।

गरुड़ जी जब अमृत कलश ले जा रहे थे तो राक्षसों ने अमृत कलश को छीनने का प्रयास किया। छीनने के दौरान कलश से कुछ-कुछ बूंदे इन्हीं चार जगहों पर गिरीं। उस समय से लेकर प्रत्येक 12 साल पर कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है। प्रयागराज कुंभ मेले का सभी मेलों में से बड़ा स्थान रखता है। 

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